एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 51

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This story is part 51 of 60 in the series

एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 51
कोई 20 मिनिट बाद वो नहा कर निकली बाहर तो राजू के होश उस गये.

"ऐसे क्या देख रहे हो."

"पानी की बूँदो में भीगे हुवे ये काले-काले बाल एक कामुक रस पैदा कर रहे हैं मेरे शीने में."

"चुपचाप नहा लो जाकर.मुझे बाल सूखने दो."

राजू दूसरा टोलिया लेकर घुस्स गया बाथरूम में. वो कोई 10 मिनिट में ही नहा कर निकल आया.

जब वो बाहर निकला तो प़ड़्‍मिनी की पीठ थी उष्की तरफ और वो अपने बाल सूखा रही थी. राजू उसके शुनदर शरीर को ऊपर से नीचे तक देखने से खुद को रोक नही पाया. पतली कमर का कटाव देखते ही बनता था. राजू तो बस देखता ही रही गया. उष्की साँसे तेज चलने लगी. जब उष्की नज़र थोड़ा और नीचे गयी तो उष्की सांसो की रफ़्तार और तेज हो गयी. पतली कमर के नीचे थोड़ा बाहर को उभरे हुवे नितंब प़ड़्‍मिनी के योवन की शोभा बढ़ा रहे थे.

"अफ मैं पागल ना हो जाऊ तो क्या करूँ." राजू ने मन ही मन सोचा.

राजू धीरे से आगे बढ़ा और दोनो हाथो से प़ड़्‍मिनी के नितंबो को थाम लिया.

"आअहह" प़ड़्‍मिनी उछाल कर आगे तरफ गयी. "क्या कर रहे हो.तुमने तो डरा दिया मुझे." प़ड़्‍मिनी गुस्से में बोली.

"रोक नही पाया खुद को. सॉरी."

"कुछ भी कर लो पहले और फिर सॉरी बोल दो. ये बहुत अतचा तरीका है तुम्हारा." प़ड़्‍मिनी ने कहा.
"हाँ तरीका तो अतचा है हिहिहीही.."

"बदमाश को तुम एक नंबर को."

"वो तो हूँ" राजू ने हंसते हुवे कहा.

प़ड़्‍मिनी दीवार पर टाँगे छोटे से शीसे के सामने आकर अपने बाल संवारने लगी, "तुम सच में पागल हो."

राजू ने पीछे से आकर प़ड़्‍मिनी को दबोच लिया अपनी बाहों में और प़ड़्‍मिनी के गले पर किस करके बोला, "प़ड़्‍मिनी ई लव यू."

"ई लव यू टू राजू पर."

"पर क्या?"

"हम दोनो बिल्कुल अलग हैं राजू. तुम जो चाहते हो मुझसे उसमें मैं तुम्हारा साथ नही दे सकती."

"क्या चाहता हूँ मैं ज़रा खुल कर बताओ."

"तुम्हे सब पता है.नाटक मत करो."

प़ड़्‍मिनी के इतने नझडीक आकर राजू का लिंग काले नाग की तरह फूँकारे मारने लगा था. वो अपने भारी भरकम रूप में आ गया था और प़ड़्‍मिनी को अपने नितंबो पर बहुत अतचे से फील हो रहा था.

"राजू प्लीज़ हटा लो इशे."

"क्या हटा लॅंड. कुछ समझ में नही आया." राजू ने प़ड़्‍मिनी को और ज़ोर से काश लिया अपनी बाहों में और उष्की गर्दन को चूमने लगा.

नितंबो पर लिंग की चुवन से पहले ही प़ड़्‍मिनी के शरीर में अजीब सी तरंगे दौड़ रही थी. गर्दन पर बरस रही किस्सस से उष्की हालत और पतली होती जा रही थी.

"बोलिए ना क्या हटा लॅंड. आप नही बताएँगी तो कैसे मदद करूँगा आपकी."

प़ड़्‍मिनी छटपटाने लगी राजू की बाहों में मगर राजू की पकड़ से निकलना आसाआन नही था.

"क्या मेरा लंड आपकी गान्ड को परेशान कर रहा है?"

"चुत उप! हाथ जाओ वरना जींदगी भर बात नही करूँगी तुमसे." प़ड़्‍मिनी छील्लाई.

राजू तुरंत हाथ गया और बिस्तर पर आकर लेट गया आँखे बंद करके.

"हाँ अब नाराज़ हो जाना ताकि मैं तुम्हे मनाने अओन और तुम्हे फिर से मेरे शरीर से खेलने का मोका मिले.ई हटे यू. मेरे करीब मत आना अब. तुम बहुत गंदे हो. इतनी गंदी बात नही शुनि कभी मैने." प़ड़्‍मिनी ने कहा.

"अब आपको कभी कुछ नही कहूँगा.ना ही आपके शरीर से खेलूँगा. सॉरी फॉर एवेरितिंग." राजू ने कहा.

राजू बिस्तर से उठा और ज़मीन पर एक चटाई बीचा कर उस पर तकिया रख कर लेट गया. प़ड़्‍मिनी समझ गयी की राजू ने बिस्तर उसके लिए छोड दिया है. प़ड़्‍मिनी बिस्तर पर बैठ गयी और घुतनो में सर छुपा कर शूबकने लगी.

"मेरी भावनाओ की ज़रा भी कदर नही करते तुम.प्यार क्या निभाओगे तुम. जब से प्यार हुवा है क्या तुमने कुछ भी जान-ने की कोशिश की मेरे बड़े मे. क्या पूछा तुमने कभी की कैसा फील कराती हूँ मैं अपने मम्मी पापा के बिना. क्या पूछा तुमने कभी की क्यों मेरी पहली शादी बिखर गयी. नही तुम्हे मेरे दुख दर्द से कोई लेना देना नही है. बस मेरा शरीर चाहिए तुम्हे और वो भी तुरंत. थोड़ा सा भी इंतेज़ार नही कर सकते. हवस के पुजारी हो तुम.जिसे औरात के शरीर के शिवा कुछ नही दीखता. क्यों मेरे दिल में झाँकने की कोशिश नही करते तुम.क्यों मेरे शरीर पर ही रुक जाते हो तुम. क्या ईसी को प्यार कहते हो तुम. क्या तुम्हे पता भी है किश हाल में हूँ मैं एर कैसे एक-एक दिन जी रही हूँ.मम्मी पापा की मौत के बाद पूरी तरह बिखर चुकी हूँ. तुम्हारे प्यार ने जीवन में एक उम्मीद की किरण सी दीखाई थी मगर अब सब ख़त्म सा होता दीख रहा है. ये प्यार बस शरीर तक ही रही गया है.इसे से आगे नही तरफ पा रहा है.," प़ड़्‍मिनी शूबक्ते हुवे सोच रही थी.

राजू प़ड़्‍मिनी के दिल की मनोस्थिति से बेख़बर चुपचाप पड़ा था आँखे बंद किए. "मैं प्यार कराता हूँ आपको और आप इशे शरीर से खेलना समझती हैं. पता नही कौन सी दुनिया से हैं आप. ज़रा सी नझडीकी और छेद चड़ बर्दास्त नही आपको. शादी के बाद भी यही सब चलेगा शायद. ये प्यार मुझे बर्बादी की तरफ ले जा रहा है. आपका योवन मुझे भड़का देता है और मैं आपकी तरफ खींचा चला आता हूँ. बदले में मुझे गालियाँ और तिरस्कार मिलता है आपका. प्यार ये रंग दीखायगा सोचा नही था कभी."

अचानक प़ड़्‍मिनी ने अपने आँसू पोंछे. उसने मन ही मन कुछ फ़ैसला किया था. वो बिस्तर से उठी और कमरे की लाइट बंद कर दी. कुछ देर बाद वो झीजकते हुवे राजू की चटाई के पास आ गयी और उसके पास लेट गयी. राजू को पता तो चल गया था की प़ड़्‍मिनी उसके पास लेट गयी है आकर पर फिर भी चुपचाप आँखे बंद किए पड़ा रहा.

"राजू नाराज़ रहोगे मुझसे?"

"आपका रोज का यही नाटक है. पहले मुझे कुत्ते की तरह खुद से दूर भगा देती हो फिर खुद मेरे पास आ जाती हो." राजू ने कहा.

"क्या करूँ तुम्हे बहुत प्यार कराती हूँ. तुमसे दूर नही रही सकती. ना ही तुम्हारी नाराज़गी बर्दास्त कर सकती हूँ."

"कल भी यही कहा था आपने ये सब मज़ाक है और कुछ नही." राजू ने कहा.

"मज़ाक नही है ये सच है. तुमसे बहुत नाराज़ हूँ फिर भी यहा तुम्हारे पास आई हूँ क्योंकि तुमसे बहुत प्यार कराती हूँ." प़ड़्‍मिनी शूबक्ते हुवे बोली.

राजू मन ही मन मुश्कुरा रहा था ये सब शन कर. बाहों में भर लेना चाहता था प़ड़्‍मिनी को इसे मासूम प्यार के लिए पर पता नही क्यों प़ड़्‍मिनी को थोड़ा और सतने का मूड था उष्का. "तो क्या कोई अहसान कर रही हो मुझ पर." राजू ने कहा.

"नही अहसान तो खुद पर कर रही हूँ..तुमसे दूर रही कर जी नही सकती ना इश्लीए अहसान खुद पर कर रही हूँ. तुम पर अहसान क्यों करूँगी.तुम तो जींदगी हो मेरी." प़ड़्‍मिनी ने फिर से शूबक्ते हुवे कहा.

अब राजू से रहा नही गया और उसने बाहों में भर लिया प़ड़्‍मिनी को. मगर जैसे ही उसने उसे बाहों में लिया वो हैरान रही गया. वो फ़ौरन प़ड़्‍मिनी से अलग हो गया.

"प़ड़्‍मिनी ये सब क्या है तुम कपड़े उतार कर क्यों आई हो मेरे पास."

"पता नही क्यों आई हूँ बस आ गयी हूँ किशी तरह. आगे तुम संभाल लो."

"क्या पागलपन है ये. कहा है कपड़े तुम्हारे?"

" बिस्तर पर पड़े हैं."

राजू अंधेरे में बिस्तर की तरफ बढ़ा और वाहा से कपड़े उठा कर प़ड़्‍मिनी के ऊपर फेंक दिए, "पहनो जल्दी वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा. तुमने ऐसा करके अपमान किया है मेरे प्यार का. मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगा. तुमने तमाचा मारा है मेरे मूह पर ये सब करके. यही साहबित करना चाहती हो ना की मैं हवस का पुजारी हूँ और तुम सटी सावित्री हो जिसे मैं मजबूर कराता हूँ सेक्स के लिए. मन गये आपको. आप तो साएको से भी ज़्यादा ख़तरनाक गेम खेल गयी मेरे साथ. ई हटे यू. आप ना प्यार के लायक हैं और ना शादी के लायक हैं. अब समझ में आया क्यों आपकी पहली शादी नही चल पाई. आप रिश्ते निधा ही नही सकती." राजू ने कहा.

प़ड़्‍मिनी ने ये सब शुंते ही फूट-फूट कर रोने लगी. इतनी ज़ोर से रो रही थी वो की राजू के कान फॅट रहे थे उष्का रोना शन कर.

"ये क्या तमासा है बंद करो ये नाटक!" राजू ज़ोर से छील्लाया.

प़ड़्‍मिनी शूबक्ते हुवे उठी और अपने कपड़े पहन कर वापिस वही लेट गयी चटाई पर. राजू पाँव लटका कर बिस्तर पर बैठ गया.

कमरे में एक दम खामोसी छा गयी. प़ड़्‍मिनी पड़ी-पड़ी सबक रही थी और राजू अपना सर पकड़ कर बैठा था.

.............................

रोहित हॉस्पिटल पहुँच तो गया मगर शालिनी के कमरे की तरफ जाने से डर रहा था. "पता नही बात करएंगी या नही. एक बार मिल कर अपना पाक्स तो रख दम फिर जो उनकी इतचा होगी देख लेंगी."
रोहित दबे पाँव कमरे में दाखिल हुवा. शालिनी आँखे बंद किए पड़ी थी. रोहित ने उन्हे जगाना सही नही समझा और वापिस मूड कर जाने लगा.

"रोहित!" शालिनी ने आवाज़ दी.

रोहित तुरंत मुड़ा और बोला, "क्या आप जगह रही हैं."

"तुम मुझे शोन दोगे तब ना शो पवँगी. कहा थे सुबह से. फोन भी नही मिल रहा था तुम्हारा." शालिनी ने कहा.

"मेडम आपने मुझे सुबह यहा से जाने को कहा था. दिल में दर्द और आँखो में आँसू लेकर गया था यहा से."

"जो बात तुम्हे मुझे बठानी चाहिए थी वो चौहान ने बताई. बहुत बुरा लगा था मुझे."

"मेडम रीमा से प्यार नही किया कभी मैने. हाँ अतचे दोस्त ज़रूर बन गये थे हम. वो मुझसे शादी करना चाहती है."

"क्या?" ये बात चौहान ने नही बताई मुझे.

"जी हाँ मेडम. वो मुझे प्यार कराती है. मेरे दिल में प्यार नही जगह पाया उसके लिए मगर फिर भी मैं शादी के लिए तैयार था. मगर चौहान को ये सब मंजूर नही. इश्लीए वो ज़बरदस्ती रीमा की शादी कही और कर रहा है वो भी इतनी जल्दी."

"अगर चौहान राज़ी हो गया तुम्हारी और रीमा की शादी के लिए तो क्या करोगे शादी उस से?"

"मेडम झूठ नही बोलूँगा. अब नही कर सकता शादी रीमा से."

"क्यों नही कर सकते?"

"आप जानती हैं सब कुछ पूछ क्यों रही हैं."

"शायद मुझे पता है और शायद नही भी. खैर चोदा. दुख हुवा तुम्हारे सस्पेन्षन का शन कर. मैं ड्यूटी जाय्न करते ही कोशिश करूँगी उसे कॅन्सल करवाने की."

"सस्पेन्षन की आदत हो चुकी है अब."

"ह्म भी ऑप्टिमिस्टिक रोहित. सब ठीक हो जाएगा."

"मेडम मैं कुछ मित्रो के साथ मिल कर साएको की तलाश जारी रख रहा हूँ. अभी हमारे पास सबसे बड़ा क्लू कर्नल का घर है. वही से सारे राज खुलने की उम्मीद है. हम उशी पर कॉन्सेंट्रेट करेंगे. संजय तो सस्पेक्ट है ही. मगर उष्का अभी कुछ आता पता नही है."

"वेरी गुड. मेरी कहीं भी ज़रूरात पड़े तो झीजकना मत.मैं हर वक्त तुम्हारे साथ हूँ."

"थॅंक यू मेडम.मैं चलता हूँ अब. शुकून मिला दिल को आपसे बात करके. सुबह तो भारी मन लेकर गया था यहा से. ऐसा लग रहा था जैसे की दुनिया ही उजाड़ गयी मेरी. गुड नाइट." रोहित कह कर चल दिया.

"रूको!"

"जी कहिए."

"कुछ कहना चाहती थी पर चलो चोदा. फिर कभी."

"ऐसा ही होता है अक्सर. हम दिल में छुपाए फिराते हैं वो बात मगर कह नही पाते. और एक दिन ऐसा आता है जब किशमत कहने का मोका ही नही देती जबकि हम कहने के लिए तैयार रहते हैं. बोल दीजिए मुझे जो बोलना है. हमेशा दिल में छुपा कर रखूँगा आपकी ये बात जो आप कहना चाहती हैं."

"मैं क्या कहना चाहती हूँ तुम्हे पता भी है?"

"जी हाँ पता है"

"फिर बोलने की क्या ज़रूरात है. यू कॅन गो नाउ.हहेहहे." शालिनी ने हंसते हुवे कहा.
"एक बार बोल देती तो अतचा होता. मेरे कान तरस रहे हैं वो सब शन ने के लिए. प्लीज़."

"तुम जाते हो की नही.मेरे पास कुछ नही है कहने को. इस डेठ क्लियर."

"जी हाँ सब कुछ क्लियर है स्प्राइट की तरह."

"हाहहहाहा...आआहह" शालिनी खिलखिला कर हंस पड़ी जीश से पेट के झखम में दर्द होने लगा.

"क्या हुवा मेडम?"

"कुछ नही हँसने से पेट का झखम दर्द करने लगा."

"मेरे ऊपर हँसने के चक्कर में दर्द मोल ले लिया आपने. शांति रखिए. वैसे बहुत अतचा लगा आपको हंसते देख कर. भगवान मेरी सारी खुशियाँ आपको दे दे ताकि आप हमेशा यू ही मुश्कूराती रहें."

"तुम कुछ भी करलो मैं वो बोलने वाली नही हूँ."

"यही तो मेरी बदकिशमति है. खैर जाने दीजिए. गुड नाइट. शो जाओ आप चुपचाप अब. मुझे अभी से इंक्वाइरी शुरू करनी हैं. अब बिल्कुल फ्रेश माइंड से स्टार्ट करूँगा."

"ऑल थे बेस्ट." शालिनी ने कहा

रोहित कमरे से बाहर निकला तो शालिनी का डॉक्टर मिल गया उसे.

"डॉक्टर कब तक छुट्टी मिलेगी मेडम को."

"हम कल दोपहर तक छुट्टी कर देंगे. बाद में बस ड्रेसिंग के लिए आना पड़ेगा. 20 दिन बाद स्टिचस काट देंगे."

"स्प साहिब का भी आपने इलाज किया क्या. उनकी तो बड़ी जल्दी छुट्टी हो गयी"

"नही उनका केस तो डॉक्टर अनिल के पास था. बहुत बढ़िया डॉक्टर हैं वो. स्प साहिब के ख़ास दोस्त भी हैं. मेडम का केस डिफरेंट था. उस लकड़ी ने बहुत गहरा घाव बना दिया था मेडम के पेट में."

"मगर जो भी हो आपके हॉस्पिटल में आतची केर होती है. सभी अतचे डॉक्टर हैं."

"जी हाँ. अभी अरे प्राउड ऑफ इट."

अचानक रोहित का फोन बज उठा. फोन अननोन नंबर से था.

"यार कही ये साएको का तो नही?"

रोहित ने फोन उठाया.

"हेलो."

"हेलो इस तीस इनस्पेक्टर रोहित."

"जी हाँ मैं रोहित ही हूँ बोलिए."

"दोपहर से आपका फोन ट्राइ कर रहा हूँ. मैं देल्ही से बोल रहा हूँ इंस्पेक्त्ो गणेश."




"हाँ बोलिए."

"देखिए कॉलोनेक की बहन रहती हैं यहा. हमने उनसे पूचेटाछ की है. कर्नल कहा है उन्हे भी कुछ नही पता. उनके अनुसार कर्नल का स्वाभाव ऐसा ही है.बिना बताए गायब हो जाता है. देहरादून में जो घर है उष्का वो उसने किशी सीसी नाम के आदमी को दिया है शायद."

"सीसी.पूरा नाम बोलिए ना इसे सीसी ने तो परेशान कर रखा है हमें."

"देखिए कर्नल की बहन को इतना ही पता था. एक महीना पहले कर्नल ने बताओ बताओ में बोल दिया था उसे की वो अपना देहरादून वाला घर अपने एक फ्रेंड सीसी को दे रहा है. ज़्यादा बात नही हुई इसे बड़े मे उनकी. यही पता चला यहा, सोचा आपको बता दम. मीडीया में छाया हुवा है ये साएको का केस. शायद आपको इसे से कुछ मदद मिले. ऑल थे बेस्ट" गणेश ने फोन काट दिया.

"यार ये तो गोल चक्कर में घूम रहे हैं हम. फिर बात इसे सीसी पर आ कर अटक गयी. पर इतना तो क्लियर है अब की कर्नल के घर में रहने वाला ही साएको है. उशी का नाम सीसी है. सीसी इस साएको. वेरी फन्नी. ना साएको मिल रहा है ना सीसी. दोनो एक ही हैं तो ये तो होना ही था. देखता हूँ कब तक बचोगे मिस्टर सीसी उर्फ साएको. कुछ ना कुछ तो तुम्हारे बड़े मे पता चल ही रहा है."

प़ड़्‍मिनी बुरी तरह सबक रही थी चटाई पर पड़ी हुई. दिल कुछ इसे कदर भारी हो रहा था की ज़ोर-ज़ोर से रोना चाहती थी वो पर राजू की फटकार ने उष्की आवाज़ दबा दी थी. वो अंदर ही अंदर घुट रही थी. आँखो से आँसू लगातार बह रहे थे. बहुत कोशिश कर रही थी की मूह से कोई आवाज़ ना हो पर रही-रही कर सबक ही पड़ती थी.

राजू बिस्तर पर बैठा चुपचाप सब शन रहा था.

"रोती रहो मुझे क्या है. तुम खुद इशके लिए ज़िम्मेदार हो." राजू ने मन ही मन सोचा और लेट गया बिस्तर पर चुपचाप.

प्यार में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक सकता. प्यार वो आग है जीशमे की जीवन की हर बुराई जल कर खाक हो जाती है. गुस्सा तो बहुत छोटी चीज़ है. जब आप बहुत प्यार करते हैं किशी को तो उसके प्राति मन में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक पाता. संभव ही नही है ये बात.

राजू का गुस्सा शांत हुवा तो उसे प़ड़्‍मिनी की शिसकियों में मौजूद उस दर्द का अहसास हुवा जो उसने उसे दिया था."हे भगवान मैने ये क्या किया? क्या कुछ नही कह दिया मैने प़ड़्‍मिनी को." राजू ने सोचा और तुरंत उठ कर प़ड़्‍मिनी के पास आ कर बैठ गया.

प़ड़्‍मिनी अभी भी सबक रही थी. राजू ने प़ड़्‍मिनी के सर पर हाथ रखा और बोला, "बस प़ड़्‍मिनी चुप हो जाओ."

प़ड़्‍मिनी की दबी आवाज़ जैसे आज़ाद हो गयी और वो फूट-फूट कर रोने लगी. राजू घबरा गया उस यू रोते देख.

"प़ड़्‍मिनी प्लीज़.ऐसे रोता है क्या कोई..प्लीज़ चुप हो जाओ मेरा दिल बैठा जा रहा है तुम्हे यू रोते देख कर." राजू ने भावुक आवाज़ में कहा.

"क्यों आए हो मेरे पास तुम. ना मैं प्यार के लायक हूँ ना शादी के लायक हूँ."

"प्लीज़ ऐसा मत कहो तुम तो भगवान की तरह पूजा के लायक हो. मैने वो सब गुस्से में बोल दिया था. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. "

"गुस्से में दिल की बात ही तो कही ना तुमने. और सच ही कहा. मैं बिल्कुल लायक नही हूँ तुम्हारे प्यार के. अतचा हो की साएको मेरी आर्ट बना दे ताकि धराती से कुछ बोझ कम हो. मैं और नही जीना चाहती."

"प़ड़्‍मिनी! खबरदार जो ऐसी बात की तुमने."

"तो क्या करूँ मैं अगर ऐसा ना कहूँ तो. तुम मुझे नही समझते. मेरे दर्द और तकलीफ़ का अहसास तक नही तुम्हे. मेरे पास बस एक ही चीज़ के लिए आते हो जबकि बहुत सारी उम्मीदे लगाए रखती हूँ मैं तुमसे. मेरे लिए ये प्यार कुछ और है और तुम्हारे लिए कुछ और. मैं अकेली हूँ बिल्कुल अकेली जिसे कोई नही समझता. मैं धराती पर बोझ हूँ जिसे मर जाना चाहिए."

"अगर ऐसा है तो मैं मर जाता हूँ पहले. कहा है मेरी बंदूक." राजू उठ कर कमरे की आल्मिरा की तरफ बढ़ा. बंदूक वही रखी थी उसने घर में घुस्स कर.

ये शुंते ही प़ड़्‍मिनी तर-तर काँपने लगी. इंसान अपनी मौत के बड़े मे तो बड़ी आसानी से सोच सकता है मगर जिसे वो बहुत प्यार कराता है उष्की मौत के ख्याल से भी काँप उठता है. प़ड़्‍मिनी फुआरन उठ खड़ी हुई. राजू अंधेरे में कहा है उसके कुछ नज़र नही आ रहा था. उसने भाग कर कमरे की लाइट जलाई. तब तक राजू पिस्टल निकाल चुका था आल्मिरा से और अपनी कन्पाती पर रखने वाला था. प़ड़्‍मिनी बिना वक्त गवाए राजू की तरफ भागी और बंदूक राजू के सर से हटा दी. गोली दीवार में जा कर धँस गयी.

प़ड़्‍मिनी लिपट गयी राजू से और रोते हुवे बोली, "तुम्हे नही खो सकती राजू.बहुत कुछ खो चुकी हूँ.. तुम्हे नही खो सकती. मेरा कोई नही है तुम्हारे शिवा."

"तो सोचो क्या गुज़री होगी मेरे दिल पर जब तुम मरने की बात कर रही थी. दिल बैठ गया था मेरा. आज के बाद मरने की बात कही तुमने तो तुरंत गोली मर लूँगा खुद को. प्यार कराता हूँ मैं तुमसे..कोई मज़ाक नही."

दोनो एक दूसरे से लिपटे खड़े थे. दोनो की ही आँखे टपक रही थी.

"राजू मैं जानती हूँ तुम मुझे बहुत प्यार करते हो. पर ये प्यार मेरे शरीर पर ही आकर क्यों रुक गया है. मेरे शरीर में मेरा दिल भी है और मेरी आत्मा भी. मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरात है राजू.मैं बहुत अकेला फील कराती हूँ. तुम मेरे पास आकर बस मेरे शरीर को प्यार करके हाथ जाते हो. कभी मेरे अंदर भी झाँक कर देखो राजू. इसे शुनदर शरीर के अंदर एक अंधेरा भरा हुवा है जहा सिर्फ़ दर्द और तन्हाई के शिवा कुछ और नही है."

"प़ड़्‍मिनी तुम्हारी कसम कहा कर कहता हूँ मेरा प्यार सिर्फ़ शारीरिक नही है. मैं तुम्हारा हर दर्द समझता हूँ."

"मम्मी-पापा की मौत के बाद घुट-घुट कर जी रही हूँ मैं. बिल्कुल भी मन नही लगता मेरा कही भी. रोज उनकी याद किशी ना किशी बहाने आ ही जाती है. फिर मैं खुद को गुनहगार मानती हूँ. मेरे कारण उन्हे इतनी बुरी मौत मिली. मेरे गम बाँट लिया करो राजू कभी-कभी.सिर्फ़ तुमसे ही उम्मीद रखती हूँ. तुम भी निराश करोगे तो कहा जवँगी मैं."

"तुम्हे मैने पहले भी बताया है की 7 साल का था जब मेरे पेरेंट्स गुजर गये. खून के आँसू रोया था मैं. मौत का मतलब भी नही जानता था तब. जब मुझे बताया गया उनके बड़े मे तो यही लगा की कही घूमने गये हैं. जानता हूँ तुम्हारे गम को और अतचे से समझता भी हूँ. पर क्या हम इन गामो में ही डूबे रहेंगे. निकलो बाहर प़ड़्‍मिनी."

"मैने अपने पेरेंट्स को दुख के शिवा कुछ नही दिया. मेरी शादी बिखर जाने से बहुत दुखी थे वो. पर मेरा यकीन करो राजू मैने कोशिश की थी रिश्ता निभाने की. पर उनकी हर रोज एक नयी डीमानड होती थी. शर्म आती थी मुझे रोज-रोज अपने पापा से कुछ माँगते हुवे. इतना कुछ लेकर भी उनका पेट नही भराता था. मैं सब कुछ छोड कर हमेशा के लिए अपने घर आ गयी. क्या मैने ये ग़लत किया था राजू. क्या रिश्ते को हर हाल में निभाना चाहिए. पापा बहुत नाराज़ हुवे थे मुझसे जब मैं सब कुछ छोड कर घर आई थी. काई दिन तक उन्होने बात तक नही की मुझसे. ये सब कुछ तुम्हे बठाना चाहती हूँ और भी बहुत कुछ है दिल में जो तुमसे शेयर करना चाहती हूँ. अगर तुम नही शुनोगे, मुझे नही समझोगे तो कहा जवँगी मैं. अपने मन मंदिर में तुम्हे बैठा चुकी हूँ और किश से उम्मीद करूँ."

"सॉरी प़ड़्‍मिनी.ई आम रियली सॉरी फॉर डेठ. मैं सच में बहुत कमीना हूँ. ये बात साहबित हो गयी आज."

प़ड़्‍मिनी ने राजू के मूह पर हाथ रख दिया और बोली, "बस खुद को कुछ मत कहो. तुम्हारे खिलाफ एक शब्द भी नही शन सकती मैं. हाँ मैं खुद तुम्हे बहुत कुछ बोल देती हूँ गुस्से में. फिर बाद में बहुत पचेटाती भी हूँ."

"अतचा ये बताओ.कपड़े उतार कर क्यों आई थी तुम मेरे पास?"

"मैने सोचा जब तुम्हे मेरा शरीर ही चाहिए तो समर्पित कर देती हूँ खुद को तुम्हारे आगे. सोच रही थी की शायद उसके बाद हम प्यार में और आगे तरफ पाएँगे. ये शरीर तुम्हारा ही तो है.तुम्हे देने में हर्ज़ ही क्या है."

"प़ड़्‍मिनी हम एक दूसरे को अभी समझ नही पाए हैं इश्लीए ये बातें हो रही हैं. देखना आगे से कोई भी शिकायत का मोका नही दूँगा तुम्हे. तुम्हारे हर दुख में साथ हूँ मैं प़ड़्‍मिनी. तुम अकेली नही हो. तुमने अपने पेरेंट्स को अब खोया है.मैने तो बचपन में ही खो दिया था. ये दर्द मेरे लिए इतना कामन और नॅचुरल है की तुम्हारे दर्द को कभी समझ ही नही पाया. यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी. मुझे माफ़ कर दो प़ड़्‍मिनी. आगे से ऐसा नही होगा. चलो बिस्तर पर लेट कर आराम से बातें करते हैं."

"राजू ई लव यू सो मच. मुझे उम्मीद थी की तुम मेरी बात समझोगे. तुम्हारी आँखो में मैने वो इंसान देखा है जो मेरी हर बात समझता है. तुमसे प्यार यू ही नही कर लिया मैने. एक अतचे इंसान की छवि देखी थी तुम्हारी आँखो में."

"मैं जितना भी कमीना सही पर बहुत प्यार कराता हूँ तुम्हे. कुछ भी कर सकता हूँ तुम्हारे लिए. जितना ख़ूस्स मैं अब हूँ इतना ख़ूस्स जींदगी में कभी नही रहा. मम्मी पापा की मौत के बाद अब मैं जीना सीख रहा हूँ वरना तो खुद को यहा वाहा घसीट रहा था. तुमने मेरी जींदगी को खूबसूरात बना दिया है प़ड़्‍मिनी इतना खूबसूरात की मैं पागल हो गया हूँ. इसे पागल पान में तुम्हारे साथ बहुत कुछ कर बैठा.यकीन मानो हर बात में मेरा प्यार ही था."

"राजू थोड़ा कन्सर्वेटिव हूँ मैं. कही मेरा ये बिहेवियर तुम्हे मुझसे दूर तो नही कर देगा."

"पागल हो क्या. तुमसे तो किशी हाल में भी दूर नही जाने वाला. तुम तो मेरी जान हो" राजू ने प़ड़्‍मिनी को ज़ोर से जकड़ कर कहा.

"तो थोड़ा कंट्रोल रखोगे ना अब तुम, अतलेआसट जब तक हमारी शादी नही हो जाती."

"यही पाप मुझसे नही होगा प़ड़्‍मिनी बाकी तुम कुछ भी माँग लो. दीवाना बन गया हूँ तुम्हारा.चाहूं भी तो भी खुद को रोक नही सकता."

"अफ मतलब बात वही की वही रही."

"बिल्कुल नही.अब से तुम्हारे दिल की धड़कनो को ध्यान से शुनूँगा. तुम्हारी मृज्नेयनी आँखो में ध्यान से देखूँगा. समझने की कोशिश करूँगा अपनी प़ड़्‍मिनी को. चेहरे पर कोई भी शिकन नही आने दूँगा. आँखो में आँसू आएँगे तो मैं उन्हे अमृत समझ कर पे लूँगा. तुम्हारे दुख और तकलीफ़ खुद भी खुद मेरी आत्मा तक पहुँच जाएँगे. सब कुछ करूँगा पर मेरा हक़ नही छोड सकता. आख़िर आशिक़ हूँ तुम्हारा तुम्हारे हुस्न से खेलने का हक़ बनता है मेरा."

"बहुत खूब मेरे दीवाने.तुम तो प्यार की नयी मिशाल कायम करोगे शायद."

"बिल्कुल करूँगा. तुम साथ दोगी तो मिशाल कायम हो ही जाएगी." राजू ने हंसते हुवे कहा.

"फिर तो जुंग रहेगी तुम्हारे मेरे बीच." प़ड़्‍मिनी ने भी हंसते हुवे कहा.

"जुंग तो शुरू से चल रही है हमारे बीच इसमे नया क्या है. लेकिन अब और मज़ा आएगा."

"चलो चोदा मुझे मैं अपने दुश्मन के गले लग कर क्यों रहूं."

"क्योंकि प्यार कराती हैं आप मुझसे कोई मज़ाक नही.जुंग में काई बार दुश्मन भी गले मिलते हैं."

"तुम सच में पागल हो राजू."

"हाँ तुम्हारे प्यार में पागल हहेहहे.चलो अब शोते हैं." राजू प़ड़्‍मिनी को लेकर बिस्तर की तरफ चल दिया.

"मैं भला अपने दुश्मन के साथ क्यों लेटुन."

"अभी जुंग में विराम चल रहा है.साथ लेट सकती हो कोई दिक्कत नही है." राजू ने कहा.

प़ड़्‍मिनी चेहरे पर प्यारी सी मुश्कान लिए राजू के साथ बिस्तर पर आ गयी. राजू ने लाइट बंद कर दी और प़ड़्‍मिनी को बाहों में भर लिया.

"कब करोगी मुझसे शादी"

"मैं तो कल कर लूँगी पर डाइवोर्स नही हुवा अभी. वो होते ही कर लेंगे हम शादी."

"वैसे तुमने बहुत बड़ा जोखिम लिया था कपड़े उतार कर मेरे पास आने का."

"बहुत भावुक हो गयी थी राजू.. सॉरी .दुबारा ऐसा नही होगा. मैं भी कम पागल नही हूँ तुम्हारे लिए. गुस्सा थी तुमसे बहुत ज़्यादा फिर भी तुम्हारे पास आ गयी थी वो भी कपड़े उतार कर."

"मैं भड़क जाता ना तो पचेटाती तुम बहुत. आज रात ही कामसूठरा के सारे आसान आज़मा लेता तुम्हारे ऊपर फिर तुम्हे पता चलता की मेरे पास कपड़े उतार कर आने का क्या मतलब होता है."

"डराव मत मुझे तुम वरना शादी नही करूँगी तुमसे."

"मत करना शादी. ये प्यार काफ़ी है मेरे लिए तुम पर हक़ जतने के लिए. तुम्हे मन से पत्नी मन चुका हूँ."

"अब क्या कहूँ तुम्हे.ई लव यू. लेकिन अपनी जुंग जारी रहेगी.शादी से पहले कुछ नही हहेहहे."

"एक पप्पी तो दे दो फिलहाल उसमें तो कोई जुंग नही है हमारे बीच. कोलगेट तो कर ही रखा होगा तुमने."

"हाँ कोलगेट तो कर रखा है." बस इतना ही कहा प़ड़्‍मिनी ने.

राजू आगे बढ़ा और अपने होंठो को प़ड़्‍मिनी के होंठो पर टीका दिया. प़ड़्‍मिनी ने राजू के होंठो को अपने होंठो में जकड़ने में ज़रा भी देरी नही की. ये एक ऐसी किस थी जीशमे प्यार के साथ साथ एक अंदरस्टॅंडिंग भी शामिल थी. दोनो एक प्यारी सी जुंग के लिए तैयार थे.

एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 51

एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Sex Story
 

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